बस अब लगने लगा
की प्यार की
तलाश करे ..
जभी सोचा सच्चा प्यार
करे..
दोस्तों
ने कहा तुझसे
नाह हो पाय
दिल खोज में निकाला
लाने मेरी ख़ुशी..
फिर गाडी एक जगा
एके फसी..
जभी सोचा यही है
सच्चा प्यार
वो बोला अभ नाह
हो पाए
फॅमिली का है सवाल
जभी सोचा अब नसीब
में नाह मिले ये
प्यार..
दोस्तों
ने कहा पेशेंस
रखा करे यार..
कैसे बताये दिमाग नहीं
लग पाये..
दिल और दिमाग मेल
न खाए..
किसके फीलिंग्स और किसीके
सोचे जुड़ना पाय..
फिर भी दिल आशा
लगाये..
दोस्ती के लिया कदम
आगे बढ़ाये..
दोएत बने रहना था
उसे
आशा लगाना था मुझे
एक दिन आयेगा मेरा
ख़याल
कहा कि कॉम्प्लिकेटेड होगा
आगे वापस बढ़ाना
मैं नाह डालू उसे
विचार में
में नाह करू उसके
life में complications
क्योंकि
life is so simple why to live with complications so let it be and set him
free..
हाय कम्बक्त प्यार वापस
से हो ओह
कब?
तलाश से कही हर
न जाये,
कभी लगे दिल....कभी
लगे ये दिमाग।
~zap~
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